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नगर परिषद के कांग्रेस बोर्ड में फूट!

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झुंझुनूं, 21 अगस्त।
कांग्रेस के दिन अच्छे कब आएंगे, यह सवाल पूरे देश में चल रहा है। लेकिन निचले स्तर पर भी हालात कुछ अच्छे नहीं है। झुंझुनूं नगर परिषद में भारी बहुमत के साथ कांग्रेस का बोर्ड बना था। लेकिन अब इसमें भी अपने ही बगावत पर उतर आए। कुछ खुलकर तो कुछ इशारों ही इशारों में कांग्रेस सभापति नगमा बानो को कमजोर बता रहे हैं। तो साफ भी कर रहे है कि कांग्रेस राज में कांग्रेस के ही चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अधिकारी तवज्जो नहीं दे रहे है।
झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर आए पार्षद मकबूल हुसैन ने झुंझुनूं नगर परिषद की शिकायत डीएलबी डायरेक्टर से की है। जिसमें उन्होंने आयुक्त पर आरोप लगाया है कि सफाई ठेके की अवधि बढ़ाने और नया सफाई ठेका देने के नाम पर आयुक्त रोहित मील द्वारा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। हाल ही में भी बिना कोई जानकारी के ठेकेदारों के एक—एक महीने का सफाई ठेका 20—20 हजार रुपए लेकर बढा दिया गया। जबकि सफाई समिति के सामने तक प्लान नहीं रखा गया है। एक महीने की अवधि भी खत्म होने को है। लेकिन अभी तक नया ठेका देने का भी प्लान समिति के सामने नहीं रखा गया है। आयुक्त पुल बनाकर अपने चेहतों को ठेका देने की फिराक में है।
पार्षद मकबूल हुसैन ने बताया कि वे खुद सफाई समिति प्रथम के सदस्य है। साथ ही रोशनी समिति के अध्यक्ष भी। बावजूद इसके उन्हें अभी तक यह नहीं पता कि नगर परिषद पुरानी सफाई व्यवस्था ही कायम रखेगी या फिर नई बनाएगी। हर काम को गुपचुप तरीके से किए जा रहे हैं। आम चर्चा है कि आयुक्त ने ठेकेदारों से पैसे ले लिए है। जिन्हें ठेके देने की फिराक में है। उन्होंने सभापति नगमा बानो पर भी आरोप लगाया कि वे उनसे भी कई बार शिकायत कर चुके है। लेकिन आयुक्त और सभापति गुपचुप में फैसले ले रहे है। जो सही नहीं है। उन्होंने इस संदर्भ में डीएलबी डायरेक्टर से शिकायत की है। उन्होंने आयुक्त की योग्यता पर भी सवाल उठाए है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने डीएलबी डायरेक्टर से मांग की है कि नगर परिषद में छोटी नगरपालिका स्तर के ईओ को चार्ज देना सही नहीं है। या तो यहां पर कमिश्नर ही लगाया जाए या फिर आरएएस अधिकारी को चार्ज दिया जाए।
चाहे कोई ना ले या ना लें, लेकिन यह तय है कि जिस तरह प्रदेश सरकार में कांग्रेस के लिए आल इज वैल नहीं है। वहीं झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस के लिए आल इस वैल नहीं है। कांग्रेस पार्षदों की सभापति नहीं सुनती, सभापति की कमिश्नर नहीं सुनता, कमिश्नर एक ईओ होते हुए इस बड़े पद पर बैठा है। इस तरह के हालातों से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर के जिम्मेदारों की स्थिति कैसी है और इनकी ऐसी स्थिति है तो शहर की कैसी स्थिति हो सकती है।
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सभापति और आयुक्त टालते है बात
पार्षद मकबूल हुसैन ने बताया कि सभापति कांग्रेस का है, बोर्ड कांग्रेस का है। इसलिए उन्होंने बैठकों में भी समय—समय पर बातें रखी है। लेकिन सभापति और कमिश्नर दोनों ही बातों को टाल देते है। उन्होंने बताया कि सफाई समिति की बैठक नहीं होती और होती है तो खानापूर्ति के लिए। उन्होंने कहा कि बड़ी चिंता की बात है कि कमिश्नर सभापति की बात तक नहीं मानते है और अपने रसूख से संविदा कर्मचारियों को लगा रखा है। जिसका भार भी नगर परिषद पर आ रहा है। उन्होंने कई बार बेवजह लगाए गए संविदा कर्मचारियों को भी हटाने की मांग की। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही जो नगर परिषद के 194 सफाई कर्मचारी है। उनका भी अता—पता नहीं है। उनसे भी सफाई करवाने की बजाय, इधर—उधर लगा रखा है।
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उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा बोर्ड
इधर, पूर्व सभापति एवं सफाई समिति की अध्यक्ष के पति खालिद हुसैन ने कहा कि जिस विश्वास के साथ शहर की जनता ने कांग्रेस का बोर्ड बनाया था। उस जिम्मेदारी और विश्वास पर नगर परिषद बोर्ड खरा नहीं उतरा है। उन्होंने कहा कि शहर को सफाई व्यवस्था के लिहाज से 37 जोन में बांट रखा है। जिस पर महीने का करीब एक करोड़ रुपए खर्च होता है। लेकिन सफाई कहीं नहीं है। रोशनी व्यवस्था ठप पड़ी है। इसका ठेकेदार भी नगर परिषद के करोड़ों रुपए मांगता है और कहता है कि जब तक बकाया नहीं मिलेगा। काम नहीं करेगा। इसलिए रोशनी व्यवस्था भी ठप हो गई है। इस तरह की व्यवस्था से पूरा शहर त्रस्त है और अब खुद कांग्रेस के पार्षदों को भी लगने लगा है कि शहर का कोई धणी धोरी नहीं है।
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इग्नोर भी किया जा रहा है, लापरवाही भी
पूर्व सभापति खालिद हुसैन ने बताया कि उनकी पत्नी सफाई समिति की अध्यक्ष है। लेकिन उन्हें अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे द्वारा दिए गए पत्रों का जवाब नहीं मिल रहा और ना ही समिति की बैठक की सूचना दी जा रही है। जबकि अध्यक्ष ही बैठक की तारीख, एजेंडे तय करती है। लेकिन यहां तो सूचना तक नहीं है। कांग्रेस पार्षद को ना केवल इग्नोर किया जा रहा है। बल्कि आयुक्त स्तर पर भी लापरवाही दिख रही है। आयुक्त आज दिन तक यह जवाब भी नहीं दे पाए है कि स्थायी कर्मचारी कितने लगे है, उन्हें कहां लगा रखा है, सफाई ठेका कब तक का है, टैंडर क्या होंगे, व्यवस्था क्या होगी। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि आयुक्त और सभापति को सभी पार्षदों को साथ लेकर चलना चाहिए।
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आरोप मनगढ़ंत, आपसी फूट है
इधर, आयुक्त रोहित मील ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने कहा कि शिकायत करने से पहले भ्रष्टाचार का प्रमाण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन पार्षदों की आपसी फूट का निशाना उन्हें बनाया जा रहा है। जबकि कोई भी काम हो, सब नियम कायदों से किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने नाम लिए बगैर कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे है। उनकी घर से महिलाएं पार्षद है। हम जवाब उन्हें दे सकते है, सूचना उन्हें दे सकते है। जो दी जा रही है। उनके प्रतिनिधियों से नगर परिषद का कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी सफाई संबंधी फैसले लिए गए है। वो कार्यपालक समिति और बोर्ड की समिति से अनुमति लेकर लिए गए है।

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