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राज्य जीएसटी की निलामी पर उठे सवाल

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झुंझुनूं, 22 अगस्त।
झुंझुनूं में राज्य जीएसटी द्वारा दूसरी बार निलामी की कार्रवाई की गई। बताया जाता है कि जीएसटी लगने के बाद किसी जब्त सामान की झुंझुनूं के अलावा देश में शायद ही कहीं निलामी की गई हो। या फिर प्रदेश में तो कंफर्म दो बार सामान निलाम किया गया। वो झुंझुनूं में ही। लेकिन इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे है। दो बार निलाम सामान एक ही ट्रांसपोर्टर के ट्रक से जब्त किया गया। यही ट्रांसपोर्टर इन कार्रवाई को नियमों व कोर्ट के आदेशों के विरुद्ध और दुर्भावना से बता रहा है।
राज्य जीएसटी के सहायक आयुक्त महेंद्र आनंद ने बताया कि पिछले साल 15 सितंबर को एक ट्रक को पकड़ा गया था। जिसमें टैक्स चोरी का सामान था। इस मामले में ट्रक मालिक द्वारा पैनल्टी जमा करवाने के बाद ट्रक को छोड़ दिया गया था। वहीं माल को लेकर कोई भी व्यापारी द्वारा टैक्स व पैनल्टी ना जमा कराने के कारण नियमानुसार निलामी की गई। इस निलामी के लिए आयुक्त द्वारा एक तीन सदस्यों की कमेटी का गठन भी किया गया था। जिसका नेतृत्व अतिरिक्त आयुक्त बीकानेर रजनीकांत ने किया।
सहायक आयुक्त महेंद्र आनंद ने बताया कि तीन महीने का ट्रांसपोटर्स को टाइम दिया गया। वहीं कमेटी गठन के बाद भी एक महीने का समय दिया गया है। ट्रक को लेकर राशि जमा करवाने पर ट्रक को छोड़ दिया गया है। लेकिन सामान को लेकर कोई भी राशि जमा नहीं हुई। जिसके बाद यह निलामी की गई है। वहीं हाईकोर्ट संबंधी कोई भी स्टे का आॅर्डर नहीं मिला है। जो भी निलामी की गई है। वो नियमानुसार की गई है।
इधर, इस निलामी को ट्रक मालिक सज्जनसिंह ने गलत और अवैध बताया है। उन्होंने कहा कि विभाग एक तरफ तो यह कह रहा है कि उनके पास माल को लेकर कोई व्यापारी नहीं आए और उन्होंने कोई पैसा जमा नहीं करवाया। जबकि सच तो यह है कि 16 व्यापारियों ने आकर माल को लेकर अपना हक जमाया था और वे ना केवल टैक्स बल्कि, पैनल्टी देने को भी तैयार थे। लेकिन विभाग के अधिकारियों ने मामले को बिगाड़ने के लिए उन्हें बरगला के रखा। जब बीकानेर में अपील की गई तो भी उसे खारिज कर दिया गया। अब हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। लेकिन वर्क सस्पैंड के चलते सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद लगातार व्यापारियों और उन्होंने विभाग से निवेदन किया कि यह निलामी 15 दिन के लिए बढ़ाई जाए। लेकिन दुर्भावनावश विभाग ने सामान को निलाम कर दिया।
ट्रांसपोटर्स सज्जनसिंह ने बताया कि यह उनके साथ दूसरा मामला है। इससे पहले भी जब वे कोर्ट में गए हुए थे। तो नियमों के परे जाकर उनके ट्रक को निलाम कर दिया गया। वहीं सज्जनसिंह ने राज्य जीएसटी के इन अधिकारियों की एसओजी और एसीबी से जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके ट्रकों को निशाना बनाकर गलत कार्रवाई की जा रही है। जबकि अन्य ट्रांसपोटर्स से मोटा पैसा लेकर उन्हें खुली छूट दी हुई है। उन्होंने बताया कि 2016 में उन्होंने विभाग के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए ट्रेप करवाया था। जिसका बदला उनसे लिया जा रहा है।
विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई और दूसरी तरफ लगे गंभीर आरोपों से यही लगता है कि इन निलामियों को लेकर विभाग जो जल्दबाजी दिखा रहा है। उनमें कहीं ना कहीं गड़बड़ तो है। ट्रांसपोटर्स ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि दूसरी बार जब उसके ट्रक से जब्त माल की निलामी की गई है। उनमें से तीन—चार व्यापारियों के माल तो बाकायदा ई वे बिल के साथ थे। लेकिन उन्हें भी बेचने में विभाग ने कोई गुरेज नहीं किया। बहरहाल, इस मामले को लेकर अब विवाद जुड़ गया है। जिसका आने वाले दिनों में ही पर्दा उठ पाएगा।

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