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54 हजार व्याख्याताओं की मांग

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झुंझुनूं, 12 जून।
स्कूल व्याख्याता से प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति में संख्यात्मक अनुपात लागू करने की जोर पकड़ने लगी हैं। कोरोना काल में धरना प्रदर्शन रैली की बजाए पूरे राजस्थान एवं झुंझुनूं जिले के व्याख्याता ट्विटर और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मांग पुरजोर तरीके से मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के सामने रख रहे हैं। रेसला जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र कुल्हार ने बताया कि वर्तमान में पूरे राजस्थान में 54 हजार व्याख्याता एवं 3500 सैकंडरी प्रधानाध्यापक कार्यरत है। जहां 54 हजार व्याख्याताओं की संख्या होने के बावजूद प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के अवसर 15 फीसदी हैं। जबकि सैकंडरी प्रधानाध्यापक की संख्या राजस्थान में बहुत कम 3500 होने के बावजूद उनके लिए प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के अवसर 115 फीसदी हैं। ये व्याख्याता वर्ग के साथ घोर अन्याय है। ऐसा अन्याय इतिहास में पहली बार देखने को मिल रहा है। प्रदेश महिला उपाध्यक्ष अंजू चौधरी का कहना है कि शिक्षा विभाग की वर्तमान पदोन्नति नीति से  उच्च योग्यताधारी व्याख्याता साथियों को प्रधानाचार्य बनने में 15 से 20 साल का समय लग रहा है। जबकि निम्न योग्यताधारी सैकंडरी प्रधानाध्यापक तीन साल में प्रधानाचार्य बन जाते है। इसलिए सरकार को प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति में संख्यात्मक अनुपात लागू करे पूरे राजस्थान के 54 हजार व्याख्याताओं सहित लगभग पांच लाख शिक्षकों को न्याय प्रदान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ रेसला मांग करता हैं कि वर्तमान में राजस्थान में व्याख्याताओं की संख्या 54 हजार और सैकंडरी प्रधानाध्यापक की संख्या 3500 को ध्यान में रखते हुए प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति में व्याख्याता और सैकंडरी प्रधानाध्यापक अनुपात 94:6 होना चाहिए। रेसला जिला अध्यक्ष प्रमेंद्र कुल्हार ने बताया कि 20 वर्ष पहले पदोन्नति में अनुपात 50:50 होता था। व्याख्याताओं की संख्या 23 हजार  और सैकंडरी प्रधानाध्यापक की संख्या 9 हजार होने पर अनुपात 67:33 किया गया। लेकिन वर्तमान में व्यख्याताओं की संख्या 54 हजार और सैकंडरी प्रधानाध्यापक की संख्या 3500 होने पर सरकार को शीघ्र संख्यात्मक अनुपात लागू के पूरे राजस्थान के व्याख्याता वर्ग को न्याय प्रदान करना चाहिए। इसके अलावा झुंझुनूं एवं नागौर जिले के व्याख्याताओं के स्थानांतरण पर राहत देनी चाहिए तथा पूर्ववर्ती सरकार द्वारा की गई वेतन कटौती निरस्त करनी चाहिए।

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