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10 हजार लेने के बाद मोबाइल में लिखकर कहा, 7 हजार और देने है

मलसीसर थाने का हैड कांस्टेबल महेंद्रसिंह मीणा रिश्वत लेते गिरफ्तार, मारपीट के मामले में की सौदेबाजी

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मलसीसर, 24 जून।
झुंझुनूं के मलसीसर थाने के हैड कांस्टेबल महेंद्रसिंह को गुरूवार को 10 हजार रूपए की रिश्वत के साथ सीकर एसीबी की टीम ने गिरफ्तार किया है। एसीबी सीकर के डीएसपी जाकिर अख्तर ने बताया कि मलसीसर के रहने वाले गजेंद्रसिंह ने सीकर एसीबी में परिवाद दिया था कि उसके भाई के साथ पड़ौसियों ने 10 जून को मारपीट की थी। जिसका मामला उसने मलसीसर थाने में दर्ज करवाया। मामले की जांच हैड कांस्टेबल झुंझुनूं के कोलसिया निवासी महेंद्रसिंह के पास थी। महेंद्रसिंह ने रिपोर्ट देने के साथ ही परिवादी गजेंद्रसिंह से पैसे मांगने शुरू कर दिए। उसने परिवादी से कहा कि यदि वह 30 हजार रूपए दे देगा तो नामजद चारों आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने के साथ—साथ उन्हें रातभर थाने रखकर धुनाई भी करेगा। लेकिन परिवादी गजेंद्रसिंह ने इतने पैसे नहीं होने की बात कही। इसी दौरान 18 जून को गजेंद्रसिंह ने सीकर एसीबी में शिकायत की। जिसके बाद 19 जून को शिकायत का सत्यापन करवाया गया। इस सत्यापन के दौरान महेंद्रसिंह ने 15 हजार रूपए में सौदा तय किया। गुरूवार को गजेंद्रसिंह 10 हजार रूपए लेकर मलसीसर पहुंचा। वहीं सीकर एसीबी ने भी जाल बिछा रखा था। हैड कांस्टेबल महेंद्रसिंह के 10 हजार रूपए लेने के साथ ही एसीबी सीकर की टीम ने उसे दबोच लिया और रंग लगे रूपए भी बरामद कर लिए। परिवादी गजेंद्रसिंह ने बताया कि उसके द्वारा दर्ज करवाए गए मामले के बाद सामने वाले पक्ष ने भी उसके भाई के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज करवा दिया था। जिसकी जांच भी महेंद्रसिंह के पास आ गई। इस जांच में कोई कार्रवाई ना करने पर महेंद्रसिंह और पैसे मांग रहा था। गुरूवार को जब गजेंद्रसिंह ने महेंद्रसिंह को 10 हजार रूपए दिए तो महेंद्रसिंह ने उसके भाई पर दर्ज हुए मामले का जि​क्र किया और पूरे मामले में सात हजार रूपए और मांगे। उसने मोबाइल के केलकुलेटर एप के जरिए हिसाब करके बताया कि इस मामले 10 हजार रूपए आने के बाद अब उसे सात हजार रूपए और देने होंगे। लेकिन वह और कुछ बात करता, उससे पहले सीकर एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। सीकर टीम द्वारा यह कार्रवाई डीएसपी जाकिर अख्तर के नेतृत्व में की गई। जिसमें सीआई सुरेशचंद्र, हैड कांस्टेबल रोहिताश्वसिंह, रीडर राजेंद्रप्रसाद, एलसी सुशीला, कांस्टेबल कैलाशचंद्र, रामनिवास, दिलीपकुमार शामिल थे।
बुधवार को कर रहा था फोन पर फोन
परिवादी गजेंद्रसिंह ने बताया कि वैसे ही उसका भाई वीरेंद्र पिछले 10 सालों से बीमार चल रहा है। लेकिन मारपीट के बाद वह मानसिक रूप से और बीमार हो गया। इसलिए बुधवार को वह उसे दिखाने के लिए बाहर गया हुआ था। बावजूद इसके हैड कांस्टेबल महेंद्रसिंह लगातार फोन कर पैसे देकर जाने का दबाव बना रहा था। गुरूवार को भी परिवादी गजेंद्र थाने पहुंचा और महेंद्रसिंह को थाने के अंदर पैसे दिए। इस दौरान और सात हजार रूपए लेने—देने की बात हो रही थी कि सीकर एसीबी की टीम ने दबोच लिया।
मंगवाया दो हजार रूपए का ब्लू टूथ
परिवादी गजेंद्रसिंह की मोबाइल की दुकान है। जिसके बारे में हैड कांस्टेबल महेंद्रसिंह को जानकारी थी। मामला दर्ज होने के बाद जब दोनों पक्षों में पैसों की सौदेबाजी हो रही थी तो महेंद्र ने गजेंद्र की दुकान से एक ब्लू टूथ भी मंगवाया। जिसकी कीमत करीब दो हजार रूपए थी। गजेंद्र ने यह ब्लू टूथ भिजवाया और महेंद्र को इसके दो हजार रूपए भी रिश्वत की राशि में भरने को कहा। जिस पर महेंद्र राजी हो गया।
सीकर ननिहाल, इसलिए की वहां ​शिकायत
गजेंद्रसिंह ने बताया कि उसका ननिहाल सीकर में है। इसलिए वह अकसर सीकर आता—जाता रहता है। उसे पता नहीं था कि झुंझुनूं में एसीबी का आफिस कहां है। किसी से पूछता तो बात कहीं और चले जाने का डर था। इसलिए उसे ध्यान आया कि सीकर में एसीबी का आफिस कहां है। जिसके बाद वह सीकर एसीबी आॅफिस पहुंचा और हैड कांस्टेबल के खिलाफ शिकायत की। हैड कांस्टेबल नवलगढ के पास कोलसिया का रहने वाला है।

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