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हाईकोर्ट ने दिए मृत कॉन्स्टेबल की पत्नी की अनुकंपा नियुक्ति के आदेश

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झुंझुनूं। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में आबकारी विभाग में कार्यरत कॉन्स्टेबल की सडक़ दुर्घटना में मृत्यु के बाद विभाग द्वारा उसकी पत्नी को आश्रित के रूप में अनुकंपा नियुक्ती देने से मना करने के आदेश को खारिज कर, आबकारी विभाग को मृतकर्मी की विधवा को तीन माह में नियुक्ति दिए जाने बाबत प्रभावी कार्यवाही करने के आदेश दिए है। मामले के अनुसार डूमरा निवासी याचिकाकर्ता अनिता देवी व उसके पुत्र साहिल चौधरी ने हाईकोर्ट में एडवोकेट संजय महला के जरिये रिट याचिका दायर कर बताया किए 10 फरवरी 2015 में नवलगढ़ के आबकारी थाने में कॉन्स्टेबल पद पर कार्यरत उसके पति सुभाषचंद्र की ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद प्रार्थिया ने आश्रित के रूप में अपने नाबालिग पुत्र साहिल को उसके बालिग होने तक अधिकार सुरक्षित रखे जाकर, बालिग होते ही नियुक्ति दिए जाने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिसे विभाग ने स्वीकार कर 6 नवंबर 2015 को आदेश दिया कि 27 सितंबर 2020 को उसके पुत्र के 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद, 3 माह में आवेदन करने पर अनुकम्पा नियुक्ति दे दी जाएंगी। इसी दौरान 2 वर्ष बाद विभाग ने फिर एक आदेश 30 जून 2017 को जारी कर, नियमों का हवाला देते हुए उल्लेख किया कि नाबालिग के संबंध में नियुक्ति आवेदन को भविष्य में लंबित नही रखा जा सकता, इसी के साथ आवेदन खारिज कर दिया। जिस पर तत्काल 11 जुलाई 2017 को प्रार्थिया ने मृतक की बेवा के रूप में उसे नियुक्ति दिए जाने की प्रार्थना की। जिसे आबकारी विभाग ने 2 अगस्त 2017 को उसके आवेदन को भी खारिज कर दिया। बहस के दौरान एडवोकेट संजय महला कहा कि विभाग ने जानबूझकर 2 साल तक उसके पुत्र को नियुक्ति दिए जाने के लिए प्रकरण को लंबित रखकर अचानक बाद में नियमों का हवाला देकर खारिज कर घोर लापरवाही की है। इसके बाद मृतकर्मी की पत्नी का आवेदन तकनीकी कारणों से खारिज कर, नियमों व न्याय दिए जाने के ध्येय को असफल करने वाला है। दूसरी ओर विभाग ने नियुक्ति नही दिए जाने के अपने फैसले को जायज ठहराया। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश आलोक शर्मा ने दोनों पक्षो की सुनवाई के बाद, आबकारी विभाग के नियुक्ति नही दिए जाने के फैसले को मनमाना, न्याय के उद्देश्य को असफल करने वाला माना। मृतकर्मी के परिवार के समक्ष उत्पन्न कठिनाईयों को देखते हुए कहा कि विभाग ने स्वयं दो साल मामले को लंबित रख कर, फिर बिना तथ्यों व परिस्थियों पर गौर फरमा, यंत्र की तरह तकनीकी खामियों के आधार पर व बिना कोई शिथिलता प्रदान किए पत्नी का आवेदन मनमाने तरीके से खारिज कर दिया। उन्होंने याचिका मंजूर कर विभाग को आदेश दिए हैं कि प्रार्थिया को अनुकम्पा नियुक्ति देने के लिए तीन माह में कार्यवाही करें।

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