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वन विभाग के कर्मचारी बोले, ‘साहब वनकर्मियों को इस प्रकार एपीओ किया गया तो कैसे बचा पाएंगे वन भूमि’

गुढ़ा आत्मदाह मामले में एपीओ किए गए रेंजर सहित अन्य कार्मिको को पुन: लगाने की मांग को लेकर वनकर्मियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

झुंझुनूं, 11 जुलाई। गुढ़ा क्षेत्र में सर्वे करने पहुंची वन विभाग एवं राजस्व विभाग की टीम के सामने अतिक्रमी जमाए बैठे व्यक्ति ने खुद पर आग लगाकर वन विभाग के रेंजर को पकड़ कर आग की लपटों में साथ लेने तथा टीम पर अतिक्रमियों द्वारा पत्थरबाजी करने के विरुद्ध में वन विभाग के कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर रवि जैन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि गुढ़ा क्षेत्र के कांकरिया में प्रकाशचंद्र पुत्र ग्यारसीलाल सैनी काफी समय में वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण जमाएं बैठा था। जिसको बार-बार रोकने के बावजूद भी निर्माण कार्य जारी रखा। जब-जब वन विभाग की टीम अतिक्रमण रोकने पहुंची तो महिलाओं द्वारा विरोध करने पर बैरंग लौट आई। इसके बाद  बार-बार शिकायत आने पर न्यायालय सहायक वन संरक्षक झुंझुनूं के आदेशों की पालना के अनुरूप जब सात जुलाई  को वन एवं राजस्व विभाग की टीम संयुक्त रूप से पटवारी, सर्वेयर एवं क्षेत्रिय वन अधिकारी व उनके अधीनस्थ स्टाफ के तैयार की गई फर्द रिपोर्ट पर अतिक्रमी सहित अन्य के हस्ताक्षकर करवाएं गए थे। ज्ञापन में बताया गया कि जब टीम सर्वे करने पहुंची तो वहां अतिक्रमी ने अपने खुद के भाई बाबूलाल सैनी पर तेल डालकर आग लगा दी तथा वन विभाग के स्टाफ के पीछे भगा दिया। जिससे साफ जाहिर होता है कि प्रकाश खुद वन भूमि को हड़पना चाहता है। ज्ञापन में बताया कि अतिक्रमी द्वारा अपने ही परिवार के सदस्य के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार करने से अतिक्रमी की मंशा का पता चलता है। जिसने ना खुद अपने भाई को बचाया बल्कि पत्थरबाजी करके विभाग के कार्मिकों को भी बचाने नहीं दिया। ज्ञापन में बताया गया कि पूरे घटनाक्रम में पुलिस को अवगत कराए जाने पर भी सहयोग नहीं मिला। इस दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि विभाग के कर्मचारियों को आए दिन भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। जो एक गंभीर विषय है। ज्ञापन में बताया गया कि वन विभाग के कार्मिकों द्वारा न्यायालय के आदेश की पालना में सर्वे की कार्रवाई की गई। परंतु घटना के पश्चात विभाग के कुछ कार्मिकों को एपीओ कर दिया गया इससे विभाग के कार्मिकों का हौंसला पस्त हुआ है। वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि इस प्रकार के झूठे मुकदमे लगा कर आरोपियों द्वारा वन भूमि को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। अतिक्रमियों द्वारा वन भूमि को हड़पने के प्रयास के लिए खुद को घायल करने की कोशिश की आड़ में वन कर्मियों को डराकर भगाने में वन विभाग को बचा पाना असंभव हो जाएगा।  इसलिए वन कर्मियों के विरुद्ध दर्ज किए गए मुकदमे को वापस लेकर क्षेत्रीय वन अधिकारी उदयपुरवाटी रेंजर व अन्य स्टाफ को फिर से लगाया जाए। ज्ञापन में बताया गया कि कि वन विभाग के कार्मिक विषम परिस्थितियों में भी 24 घंटे वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा तथा वन विकास के कार्य करते हैं। किसी भी परिस्थिति में उनको अपने कार्य के लिए सजग रहते हुए मौका स्थल पर जाना होता है। कई बार त्वरित कार्यवाही के लिए पुलिस जाब्ता लिए बिना भी मौके पर पहुंचना होता है। अन्यथा वन एवं पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंच सकता है।  ज्ञापन देने वालों में क्षेत्रीय वन अधिकारी मामचंद ढाका, रणजीतसिंह खीचड़, विजय फगेडिय़ा, अमित सैनी, सुनील कुमार, सुलोचना, सुरेश, रघुवीर, रामसिंह सहित अन्य वन विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।

ज्ञापन में यह मांग की गई

ज्ञापन में वन कर्मियों द्वारा मांग की गई कि अतिक्रमी के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने पर कार्रवाई की जाए। एपीओ किए गए रेंजर सहित अन्य वन कर्मियों को फिर से लगाया जाए तथा  इस प्रकार की विषम परिस्थितियों में समर्पित रूप से कार्य करने वाले वन कर्मियों का वन एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए हौंसला बढ़ाने की आवश्यकता है।

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