Jhunjhunu Update
Raho Update Jhunjhunu Se

‘म्हें तो अनपढ़ हां साहब! फारम को बेरो कोनी चाल्यो, इहलिए म्हारै टाबरां की पहले आली स्कूल बदल दी अब दूर की स्कूल कोनी भेज सकां बच्चा न’

महात्मा गांधी खीदरसर स्कूल में पहले से अध्ययनरत  विद्यार्थी हुए ‘ड्रॉप आउट’?

झुंझुनूं, 6  जुलाई। जिला मुख्यालय पर एक अंग्रेजी माध्यम की सरकारी स्कूल हो इसके लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल के नाम से स्कूल प्रारंभ की है। जिले के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खिदरसर स्कूल का नाम इस श्रेणी में शामिल हैं। जिसमें प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इंग्लिश मीडियम स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए जिनके बच्चें निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उन्होंने भी अपने बच्चों का दाखिला करवा दिया है। जिससे बड़ी समस्या वाली बात यह रही हैं कि स्कूल में पहले से अध्ययनरत कुछ विद्यार्थियों को छोडक़र बाकी के सामने स्कूल छोडऩे या फिर दूर की स्कूल में एडमिशन लेने की समस्या चुनौती बनकर खड़ी हो गई। क्योंकि सीटों से अधिक आवेदन आ जाने पर लॉटरी के माध्यम से विद्यार्थियों का चयन हुआ है। जिससे वंचित रहे इस स्कूल के पूर्व के विद्यार्थियों को अब मजबूरन स्कूल बदलनी पड़ेगी। चाहे फिर उस विद्यार्थी के अभिभावक दूसरी स्कूल दूर होने पर पढ़ाई ही क्यों ना छुड़वा ले इसका जिम्मेदारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता दिख रहा है। जब शुक्रवार को प्रवेश के लिए स्कूल में द्वितीय चरण की लॉटरी निकाली गई तो 30 नए बच्चों का चयन हुआ। तो वहां अपने बच्चों का दाखिला करवाने आए गोपीराम बंजारा मायूस होकर कागज पत्रों के साथ बैरंग लौट गए।  गोपीराम के दोनों पुत्र इसी स्कूल में पढ़ रहे थे जबकि अब उनके सामने इस स्कूल पढऩा समस्या आ गई है। गोपीराम से पूछने पर बताया कि ‘म्हें तो मजदूर लोग हां साहब, म्हाने फॉर्म को बेरो कोनी चाल्यो, अब इजा एडमिशन ना हो रह्यो तो टाबरां न दूसरी जगह कोनी भेज सकां…’ गोपीराम के मुंह से निकले यह शब्द ना केवल बच्चें के दाखिले की मांग कर रहे थे जबकि पढ़ाई के प्रति एक अनपढ़ पिता की बच्चों के प्रति जो सोच बनी वह भी देखी गई। आपको बता दें यह एक नहीं जबकि कई ऐसे मामले है जिन पर जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया और अभिभावकों ने दूर भेजने की बजाए बच्चों की स्कूल छुड़वा ली।

इन स्कूलों में लेना होगा प्रवेश

शिक्षा अधिकारियों की माने तो खिदरसर स्कूल में जो हिंदी माध्यम के विद्यार्थी है। उनमें जिनका इंग्लिश मीडियम स्कूल में एडमिशन नहीं हुआ है। उन विद्यार्थियों को पीरूसिंह, खंगा का बास एवं वारिसपुरा स्कूल में प्रवेश लेना होगा। लेकिन यह विद्यालय दूरी में लंबी होने पर कच्ची बस्तियों व खिदरसर गांव के बच्चों का आना जाना भारी पड़ेगा। इसके लिए अभिभावक भी परेशान बने हुए हैं।

अनपढ़ है इसलिए नहीं पता चला फॉर्म का

लॉटरी के दौरान अपने पहले से अध्ययनरत बच्चों का एडमिशन करवाने आए कच्ची बस्ती के गोपीराम बंजारा बच्चों के प्रमाण पत्र लिए स्कूल में अधिकारियों के समक्ष भटकते रहे।  गोपीराम ने बताया कि लॉटरी का ध्यान नहीं होने पर फॉर्म नहीं लगा सके। इसलिए अब खिदरसर स्कूल से पांचवी पास कर चुके बेटे अशोक व पारस के लिए यहां अगली कक्षा में दाखिला नहीं दिया जा रहा है। गोपीराम ने कहा कि एडमिशन नही करते है तो फिर दूर की स्कूल में बच्चों को नहीं भेज सकते हैं और मजबूरन पढ़ाई छूड़ानी होगी।

कुल थे 91 विद्यार्थी नौ हुए पास आउट

खिदरसर स्कूल में हिंदी माध्यम में पिछले सत्र में कुल 91 बच्चें अध्ययनरत थे। जिनमें नौ विद्यार्थी पास आउट हो गए। अब बचे कुल 8 3 विद्यार्थियों में लॉटरी के माध्यम से जिसका चयन हुआ वो तो ठीक है। लेकिन जिनका चयन नहीं हुआ उनके सामने समस्या खड़ी हो गई है।

‘‘बच्चों से स्कूल छुड़वाने जैसा कोई मामला सामने नहीं आया है। लॉटरी के माध्यम से प्रवेश दिया गया है। जिन विद्यार्थियों का नाम नहीं शामिल हुआ है। उनको नजदीकी स्कूलों में प्रवेश दिलवाया जाएगा।

-अमरसिंह पचार, सीडीईओ, झुंझुनूं

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More