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मां के बिना अधूरा है जीवन- लांबा

झुंझुनूं। शहर के चूरू रोड़ स्थित लांबा कोचिंग कॉलेज निदेशक शुभकरण लांबा ने कहा कि मां के बिना जीवन अधूरा है। लांबा शनिवार को विश्व मातृत्व दिवस के अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बच्चों की परवरिश का राज माता-पिता के आंचल में विशेषकर मां की छांह में छिपा हुआ है, किंतु बच्चों की परवरिश में माता जो स्नेह बच्चों पर लुटाती है उसके कारण बच्चों को हमेशा ही मां की आवश्यकता होती है। मां शब्द ही ऐसा है जिसे किसी परिभाषा के दायरे में नहीं बांधा जा सकता है और ना ही मां के प्यार को अहसान माना जाता है। क्योंकि मां जो भी अपने बच्चों के लिए करती है उसे और कोई नहीं कर सकता या यूं कहे की पूरी दुनिया में मां से ज्यादा बच्चों को प्यार करने वाला कोई दूसरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर परवरिश के लिए उनके साथ मां का आंचल सदैव होना चाहिए और इस बात को कामकाजी महिलाएं भी समझती है। इसलिए जहां तक संभव होता है कामकाजी महिलाएं बच्चों को लेकर लापरवाही नहीं बरतती है। बच्चों की उम्र बढऩे के साथ मां अपने बच्चों के साथ रिश्ते में अपनी भूमिकाएं निभाती है। पहले वह अपने बच्चों के साथ बच्चा बनकर व्यवहार करती और उनके बड़े होने पर उनके साथ धीरे धीरे दोस्ताना व्यवहार भी करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में माता पिता की अधिक जिम्मेदारियों को देखते हुए फिर भी माता पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ अपने रिश्ते को मजबूत व विश्वसनीय बनाए। इस अवसर पर शिक्षाविद् टेकचंद शर्मा, प्रो. रतनलाल पायल ने भी मां पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी मौजूद थे।

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