Jhunjhunu Update
Raho Update Jhunjhunu Se

भक्त का अहित नहीं होने देते भगवान-पं.तिवाड़ी

श्रीमहालक्ष्मी वार्षिक महोत्सव की पूर्णाहुति आज

चिड़ावा। भगवान संसार के पालनकर्ता है और अपने भक्त का अहित कभी नहीं होने देते। ये प्रवचन पं. प्रभुशरण तिवाड़ी ने कॉलेज रोड पर सनातन आश्रम में श्रीअग्र भागवत के अंतिम दिन अग्रसेन विवाह प्रसंग के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नाग कन्या माधवी से देवराज इंद्र विवाह करना चाहते थे। लेकिन अग्रसेन से उसका विवाह होने से इंद्र नाराज हो गए। अभिमान में आकर इंद्र ने अग्रसेन के राज्य में बारिश नहीं होने दी। लेकिन अग्रसेन ने महालक्ष्मी की आराधना की। फलस्वरूप माता महालक्ष्मी प्रकट हुई और इंद्र को जड़वत कर उनके अभिमान का हरण किया। इंद्र ने पश्चाताप किया और अग्रसेन से मित्रता की। कथा के दौरान आग्रेय नगरी अकाल प्रसंग, अग्रसेन का जल संचयन, अग्रसेन के पुत्र प्राप्ति, युद्ध प्रसंग, पुत्र का राज्याभिषेक और महालक्ष्मी आह्वान और शरीर त्याग करने तक के प्रसंग का वर्णन किया। कथा के समापन पर प्रवासी उद्योगपति शिवकुमार पोद्दार, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के प्रदेशाध्यक्ष झंडीप्रसाद हिम्मतरामका, महेश पोद्दार व अन्य अतिथियों ने व्यासपीठ पर विराजे वाणीभूषण पं. प्रभुशरण तिवाड़ी का और अग्र भागवत का पूजन, माल्यार्पण और तिलकार्चन, शॉल श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। वहीं आचार्य नरेश जोशी, पं. बालकृष्ण चौरासिया, पं. परशुराम शर्मा, आयोजन व्यवस्थापक राधेश्याम सेखसरिया, सुरेश शेखावत, गिरधरगोपाल महमिया, चंद्रमौलि पचरंगिया, भजन गायक राधेश्याम योगी, श्याम राणा, शुभम पारीक, ग्यारसीलाल हर्षवाल, तुलसीराम आदि का सम्मान किया गया। इस दौरान रामनिवास जांगिड़, इंद्रप्रकाश दायमा, गायत्री परिवार के गोपीराम सैनी, पसारी फाउंडेशन के डॉ. गणेश चेतीवाल, वरिष्ठ पार्षद कैप्टन शंकरलाल महरानिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More