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पर्ची कटवाने के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार…

जब बारी आती है तो डॉक्टर्स के जाने का समय हो जाता है पूरा...

झुंझुनूं, 12 अप्रेल। पर्ची कटवाने के लिए घंटे भर लंबी कतार में खड़े रहना और फिर डॉक्टर कक्ष के बाहर तथा दवाई वितरण तक लेकर लाइनों में फंसे रहना बीडीके अस्पताल में  मरीजों के लिए रोजमर्रा बनकर रह गया है। पर्ची कटवाने में मरीजों को सहलुयित मिले। इसके लिए अब पर्ची भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होनी शुरु कर दी गई है। लेकिन हाल अभी भी ज्यों के त्यों बने हुए हैं। ग्रीष्मकालीन ऋतु के चलते अस्पतालों का समय भी बदल गया है। लेकिन मरीजों को सुबह से लेकर मध्य दोपहर तक पर्ची के लिए लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है और जब मरीज का पर्ची कटवाने के लिए नंबर आता हैं तब तक डॉक्टर्स का समय पूरा हो जाता हैं। जिससे इतनी मशक्कत के बाद अधिकत्तर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।

काउंटरों पर रोज होती हैं धक्कामुक्की

पर्ची कटवाने के लिए महिला और पुरुष काउंटरों पर रोज धक्कामुक्की जैसी समस्या पैदा हो रही हैं। महिला पर्ची काउंटर की बात करें तो यहा एक काउंटर धूप में होने से महिलाओं को बगैर छाया के लंबा इंतजार करना पड़ हैं। आए दिन देखा जा रहा है कि अपनी बारी को लेकर मरीजों में आपस में बहसबाजी होती हैं। तो वहीं पुरुष महिला काउंटर तो महिला पुरुष काउंटर की घुसते रहते हैं। गुरुवार को तो जब अस्पताल खुला तो महिला काउंटर पर देखा गया कि एक महिला को पर्ची कटवाने पर ना केवल धक्कामुक्की सहना पड़ रहा है। जबकि आपस में गर्माते शब्द भी सुनने को मिलते हैं। यहां तक की काउंटर पर बैठे कर्मचारी भी इन हरकतों से परेशान होकर कुछ देर के लिए काउंटर बंद करने को मजबूर है।

आसान नहीं डॉक्टर्स तक पहुंचना

बीडीके अस्पताल की बात करें तो एक मरीज के लिए चैकअप के लिए डॉक्टर्स तक पहुंचना और दवाई लेना आसान नहीं है। इसके लिए मरीज को कई लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ता हैं और दवा लेने तक चार चक्कर लगाने पड़ रहे। पहले घंटे भर पर्ची के लिए इंतजार, फिर चिकित्सक कक्ष के बाहर लाइन, दवा वितरण के बाहर लंबी कतार और फिर से ली गई दवाई की डॉक्टर्स से पूछताछ के लिए चार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

‘‘लंबी लाइनें लगने और धक्कामुक्की जैसे हालात से निपटने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। सीमित स्टाफ होने और फिर स्टाफ के कभी कभार छुट्टी पर चले से यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती हैं।

-डॉ. शीशराम गोठवाल, पीएमओ, बीडीके अस्पताल, झुंझुनूं

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