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डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा पर आईएमए  का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

झुंझुनूं, 14 जून। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन शुक्रवार को डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा पर देशव्यापी विरोध दिवस मनाया। डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों के बाद संगठन आंदोलन मोड में चला गया है। पश्चिम बंगाल में हाल ही में एक घटना में, डॉ. परिभा मुखर्जी, एक युवा डॉक्टर को एनआरएस मेडिकल कॉलेज, कोलकाता में एक हिंसक भीड़ द्वारा बेरहमी से हमला किया गया था। वह आलोचनात्मक है और अपने जीवन के लिए लड़ रहा है। इसी क्रम में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन झुंझुनंू एवं राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ झुंझुनू के संयुक्त आह्वान पर झुंझुनंू जिले के समस्त निजी एवं सरकारी चिकित्सकों ने काली पट्टी एवं बैज लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।इस अवसर पर डॉक्टर्स के द्वारा प्रधानमंत्री के नाम पर जिला कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया गया। जिसमें एक मजबूत केंद्रीय कानून बनाने की मांग राखी गई। जिससे डॉक्टर्स की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके और भय मुक्त वातावरण बन सके। यह जानकारी देते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन झुंझुनूं सचिव डॉ. लालचंद ढाका  ने सफलतापूर्वक विरोध प्रदर्शन के लिए सभी चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी सभी चिकित्सकों से एकता कायम रखने पर जोर दिया।इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एक राष्ट्रीय लॉ अंगेस्ट हॉस्पिटल वायलेंस की मांग कर रहा है। संगठन ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों पर हिंसा के खिलाफ एक शून्य-सहिष्णुता नीति घोषित की है। विश्व मेडिकल एसोसिएशन ने स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों पर हिंसा के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया है और इस खतरे के खिलाफ मजबूत कानून लाने का आग्रह किया है। अस्पतालों पर हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय कानून को तत्काल लाया जाना चाहिए। अस्पताल की हिंसा के लिए कानून को न्यूनतम सात साल कैद की सजा देनी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मामले दर्ज किए जाते हैं। दोषियों को गिरफ्तार किया जाता है और उन्हें दोषी ठहराया जाता है, पोक्सो अधिनियम में दिए गए उचित अनिवार्य प्रावधानों को स्थापित किया जाना चाहिए। अस्पतालों को विशेष क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए और उचित सुरक्षा का प्रावधान राज्य की जिम्मेदारी होनी चाहिए। यह देखा गया है कि हिंसा में वृद्धि से बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। न केवल हिंसा का सामना कर रहे संस्थान में उपचार कर रहे मरीज सीधे प्रभावित होंगे, बल्कि इसके अप्रत्यक्ष परिणाम भी बहुत हैं। संस्थान जटिल और जोखिम भरे रोगियों को लेने के लिए अनिच्छुक होंगे जो बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करेंगे। हिंसा की धमकी स्वास्थ्य देखभाल श्रमिकों के तनाव के स्तर को बढ़ाती है। ऐसी स्थितियों में रोगी की देखभाल से संबंधित ध्वनि निर्णय से समझौता किया जाएगा। आईएमए ने अपने बयान में एनआरएस मेडिकल कॉलेज में कू्रर हिंसा की कड़ी निंदा की और घोषणा की कि पूरी चिकित्सा बिरादरी ने गंभीर रूप से घायल डॉक्टरों के प्रति एकजुटता व्यक्त की है। आईएमए ने कहा कि संगठन मजबूत कानून और अस्पताल हिंसा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए आंदोलन करने के लिए तैयार है। सेवारत चिकित्सक संघ की ओर से जिला प्रवक्ता डॉ. कैलाश राहड़ के नेतृत्व में बीडीके अस्पताल के गेट के सामने सभी चिकित्सकों ने प्रदर्शन किया और दिनभर काली पट्टी बांधकर मरीजों को परामर्शदिया।इस मौके पर कार्यवाहक पीएमओ डॉ. एसके कालेर, डॉ. जयसिंह, डॉ.रजनेश माथुर, डॉ. कमलेश कटेवा, डॉ.सेहीराम, डॉ.राजेंद्र ढाका, डॉ. राजेंद्र पायल, डॉ.वीके गुप्ता आदि मौजूद थे।

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