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एक माह तक मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक

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आज सुबह से मलमास शुरू, मकर सक्रांति तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य

झुंझुनूं, 15 दिसंबर। रविवार को सुबह नौ बजकर आठ मिनट के बाद मकर सक्रांति तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होंगे।मलमास के कारण ये कार्य नहीं हो पाएंगे।इसके बारे में जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य अभिमन्यू पाराशर ने बताया कि रविवार को सुबह नौ बजकर आठ मिनट पर सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खर मास या मलमास प्रारंभ हो जाएगा। खर मास में विवाह, नूतन गृह प्रवेश, नया वाहन, भवन क्रय करना, मुंडन जैसे शुभ कार्यों पर एक माह के लिए प्रतिबंध लग जाएगा। यह खर मास 14 जनवरी 2019 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही समाप्त हो जाएगा। पारराशर ने बताया कि वैदिक ज्योतिष में गुरु को समस्त शुभ कार्यों का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। सूर्य जब गुरु की राशि धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो इससे गुरु निस्तेज हो जाते हैं, उनका प्रभाव समाप्त हो जाता है। शुभ कार्यों के लिए गुरु का पूर्ण बली अवस्था में होना आवश्यक है। इसलिए इस एक माह के दौरान शुभ कार्य करना वर्जित रहता है। खासकर विवाह तो बिलकुल नहीं किए जाते हैं। क्योंकि विवाह के लिए सूर्य और गुरु दोनों को मजबूत होना चाहिए।

मलमास में कौन से कार्य ना करें

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खर मास के दौरान सगाई, विवाह, नए घर में प्रवेश, वाहन खरीदना, मांगलिक कार्य, कोई भी नई वस्तु, यहां तक कि उत्तर भारत के कुछ राज्यों में तो खरमास/मलमास के दौरान नया वस्त्र तक नहीं खरीदा जाता है। इस माह के दौरान घर का निर्माण कार्य भी प्रारंभ नहीं किया जाता है।*

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इस महीने क्या करना चाहिए

मलमास/खरमास के प्रतिनिधि आराध्य देव भगवान विष्णु हैं। इसलिए इस माह के दौरान भगवान विष्णु की पूजा नियमित रूप से करना चाहिए। खर मास में आने वाली दोनों एकादशियों का भी विशेष महत्व होता है। इनमें व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन करने से समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। इस मास में प्रतिदिन स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु के मंत्र ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का तुलसी की माला से एक माला जाप करें। इस दौरान पीपल के वृक्ष में नियमित जल और कच्चा दूध अर्पित करने से धन-सुख, वैभव की प्राप्ति होती है।

मकर सक्रांति पर्व पर समाप्त होता है खर मास

अभिमन्यु पाराशर ने बताया कि सूर्य एक माह बाद मकर राशि के प्रवेश करेगा। इस खास दिन को मकर सक्रांति पर्व मनाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके दान किया जाता है। इस दिन से उत्तरायण प्रारंभ होता है। जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। विवाह समेत समस्त शुभ कार्य इस दिन से प्रारंभ हो जाते हैं।

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