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आज चंद्रगहण, महिलाएं रखें सावधानी,

जप और ध्यान करने पर मिलेगा फल

झुंझुनूं, 15 जुलाई। मंगलवार को खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा।जलाराम बापा ज्योतिष संस्थान के आचार्य पं. अभिमन्यु पाराशर ने इस दिन को लेकर विशेष जानकारी साझा की है।उन्होंने बताया कि इस दिन, यानि कि मंगलवार को महिलाओं को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।वहीं क्या करने से इसका फायदा भी मिलेगा।उन्होंने बताया कि ग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल प्राप्त होता है।वहीं ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान करना चाहिए।साथ ही चंद्र ग्रहण में तीन पहर (नौ घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। वहीं बुजूर्ग, बच्चे और रोगी डेढ पहर (साढ़े चार घंटे) पहले तक खा सकते है।पं. पाराशर ने बताया कि ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए। साथ ही ग्रहण वेध के प्रारंभ में तिल या कुशमिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए। स्त्रियां सिर धोए बिना भी स्नान कर सकती है।साथ ही ग्रहण पूर्ण होने पर जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिंब देखकर भोजन करना चाहिए। वहीं ग्रहण काल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि के लिए बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुंतुद नरक में वास करता है। वहीं ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोडऩे चाहिए, बाल तथा वस्त्र नहीं निचोडऩे चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए। साथ ही ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मलमूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन ये सब कार्य वर्जित हैं। उन्होंने बताया कि ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। साथ ही ग्रहण के समय गुरु मंत्र, ईष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें। न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है। ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से 12 वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैं। सामान्य दिन से चंद्र ग्रहण में किया गया पुण्य कर्म, जप, ध्यान, दान आदि एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में 10 लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगाजल पास में हो तो चंद्र ग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्य ग्रहण में 10 करोड़ गुना फलदायी होता है। पं. पाराशर ने बताया कि गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए। तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान व दानादि का ग्रहण में महाफल है।किंतु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रांति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।

चंद्र ग्रहण का राशियों पर असर

चंद्रग्रहण पर राशियों पर भी असर पड़ेगा।मेष राशि वाली जातकों को यश और सम्मान की प्राप्ति होगी।वहीं वृष राशि के जातकों को सेहत से जुड़ी कुछ गंभीर परेशानियां आ सकती हैं। इसी प्रकार मिथुन राशि के जातकों के लिए भी चंद्रग्रहण ठीक नहीं है।उन्हें मानसिक परेशानियां बढ़ सकती है। वहीं कर्क राशि वालों को यह चंद्रग्रहण मुनाफा दिलाकर जाएगा।सिंह राशि वालों का मन परिवार की चिंता से दुखी रह सकता है। साथ ही कन्या राशि वालों के लिए धन की हानि होने की संभावना बनी है।तुला राशि वालों के लिए यह मिला-जुला दिन बिताएगा।साथ ही वृश्चिक राशि वालों के मान-सम्मान में गिरावट आएगी और काम में बाधा पैदा होने के भी संकेत है।धनु राशि वालों को किसी परिचित से विश्वासघात मिलने की संभावना है।वहीं मकर राशि के जातकों को शत्रुओं का भय रहेगा। कुंभ राशि वालों को सफलता और लाभ प्राप्ति होगी।तो वहीं अंतिम राशि, यानि कि मीन राशि के जातकों के परिवार में सुख-चैन रहेगा।

16 -17 जुलाई चंद्र ग्रहण, संपूर्ण जानकारी

पं. पाराशर ने बताया कि 16  जुलाई को पडऩे वाले खंडग्रास चंद्रग्रहण एक अद्भुत आकाशीय घटना है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है।इस अवस्था में पृथ्वी चंद्रमा को ढक लेती है और चंद्रमा का प्रकाश धरती पर नहीं आ पाता और अंधेरा छा जाता है।इसी को चंद्रग्रहण होता है।16  जुलाई को साल का दूसरा चंद्रग्रहण पड़ेगा।यह खंडग्रास चंद्रग्रहण है। इसमें पृथ्वी चंद्रमा को आंशिक रूप से ढक लेगी। इस अवस्था को खंडग्रास चंद्रग्रहण कहते है।यह दूसरा चंद्रग्रहण भारत सहित अफगानिस्तान, यूक्रेन, टर्की, इरान, इराक, सउदी अरब, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका व अंटार्कटिका में दिखाईदेगा।यह आषाढ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को दिन मंगलवार को लगने वाला है। यह खंडग्रास चंद्रग्रहण के रूप में दिखाई देगा। यह चंद्रग्रहण 16  जुलाई को रात एक बजकर 31 मिनट से लेकर रात चार बजकर 30 मिनट तक होगा।

चंद्र ग्रहण के सूतक काल का समय

इस चंद्रग्रहण का सूतक काल 16  जुलाई को शाम चार बजकर 32 मिनट से प्रारंभ होगा। जोकि चंद्रग्रहण के साथ ही 16 -17 जुलाई की मध्य रात्रि उपरांत को 4 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगा।यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देंगे इसलिए इसका सूतक काल भारत में मान्य होगा। जो ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले लग जाएगा।ये चंद्रग्रहण जिन देशों में दिखाई देगा। वहां सूतक व ग्रहण काल में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर गर्भवती महिलाओं को उन्हें ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरुरत होती है।

चंद्रग्रहण में वर्जित कार्य

ग्रहण काल के दौरान सोना वर्जित है।ग्रहण काल में खाना वर्जित होता है।भगवान की मूर्ति स्पर्श ना करें। मलए मूत्र और शौच आदि न जाए तथा किसी नए काम की शुरुआत ना करें।

चंद्रग्रहण दो घंटे 59 मिनट तक रहेगा

गुरु पूर्णिमा पर लगने वाला यह चंद्रग्रहण खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा। यह ग्रहण कुल दो घंटा 59 मिनट का होगा। ग्रहण के दौरान चंद्रबिंब दक्षिण-पश्चिम की ओर से ग्रस्त होता दिखाई देगा। यह चंद्रग्रहण 16  जुलाई की रात एक बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा और 17 जुलाई की सुबह चार बजकर 30 मिनट पर ग्रहण का खत्म होगा। इस दिन चंद्रमा शाम छह बजे से सात बजकर 45 मिनट तक उदय होगा। लिहाजा पूरे देश में ग्रहण की शुरुआत, मध्य और मोक्ष देखा जा सकेगा।

ये करने से अच्छा रहेगा चंद्रग्रहण

मान्यता है कि चंद्रग्रहण के बाद स्नान और दान करना भी बहुत अच्छा रहता है। इसलिए गेंहूं, धान, चना, मसूर, दाल, गुड़, चावल, काला कंबल, सफेद-गुलाबी वस्त्र, चूड़ा,  चीनी, चांदी स्टील की कटोरी में खीर दान से खास लाभ मिलेगा। चंद्रग्रहण जब धनु में होगा तो कर्क, तुला, कुंभ और मीन राशि के लिए लाभकारी होगा और जब मकर में आएगा तो मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन के लिए लाभकारी होगी। वृष, मिथुन, कन्या, धनु और मकर के लिए मध्यम लाभ देने वाला है।

आपकी है यह राशि, तो यह करना ना भूलें

पं. पाराशर ने अलग-अलग राशियों के लिए चंद्रग्रहण के दौरान, उससे पहले और उसके बाद किए जाने वाले कार्यों को बताया है। ताकि चंद्रग्रहण जातकों के लिए अच्छा रहे।उन्होंने बताया कि मेष राशि वालों को ग्रहण के बाद गुड़ और दाल का दान करना चाहिए। वहीं वृषभ राशि के लोग मंदिर में दही, चीनी दान कर सकते हैं। इससे घर में सुख और शांति आएगी। मिथुन राशि के जातक गाय को पालक खिलाएं।  कर्क राशि वाले शिवलिंग पर दूध चढ़ा सकते हैं। उन पर भगवान शंकर की कृपा बरसेगी। सिंह राशि के लोग तांबे की वस्तु या केसरिया वस्त्र मंदिर में चढ़ाएं। कन्या राशि वाले हरी चूडय़िां किसी कन्या या किन्नर को दें। तुला राशि के जातक अगरबत्तियां मंदिर में दान कर सकते हैं। भगवान की कृपा घर और परिवार पर बनी रहेगी। वृश्चिक राशि वालों को हनुमान जी के मंदिर में घी दान करना चाहिए। धनु राशि के जातक चने की दाल मंदिर में पंडित जी को दें, अन्न देवता की कृपा बनी रहेगी। मकर राशि के लोग काले तिल का दान करें। कुंभ राशि के लोग कहीं जल में कोयला चढ़ाएं। इससे दुश्मनों से बचाव होगा। मीन राशि के जातक गरीब बच्चों को फल दान करें।

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