तीन अक्टूबर को देशभर में आयोजित होगा 'कश्मीर एकजुटता दिवस'

भाकपा (माले) लिबरेशन के केंद्रीय कमेटी की बैठक दूसरे दिन भी जारी रही

तीन अक्टूबर को देशभर में आयोजित होगा 'कश्मीर एकजुटता दिवस'
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झुंझुनूं।  स्थानीय सामुदायिक विकास भवन इंदिरा नगर में बुधवार से चल रही भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी की बैठक में गुरुवार को देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति पर चली गहन चर्चा के बाद कई राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए। कश्मीरी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों तथा एनआरसी की अंतिम सूची के प्रकाशन से बहिष्कृत हुए असम के लगभग 20 लाख नागरिकों के नागरिक अधिकारों की गारंटी के लिए भाकपा (माले) आने वाले दिनों में देशव्यापी अभियान चलाएगी। भाकपा (माले) की बैठक में धारा 370 की वापसी और राज्य का दर्जा खत्म करने और उसके बाद कश्मीर में मोदी सरकार द्वारा नागरिक अधिकारों के दमन,  हजारों लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में रखने तथा इंटरनेट समेत तमाम सूचना तंत्र के स्थगन स्वरूप पर गहरी चिंता जाहिर की गई और आगामी तीन अक्टूबर को पूरे देश भर में कश्मीर की जनता के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई। केंद्रीय कमेटी की बैठक ने असम में एनआरसी की अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद उससे बाहर रह गई लगभग 20 लाख लोगों के नागरिक अधिकारों की बहाली के लिए हर संभव प्रयासों को तेज करने और उन को मदद पहुंचाने के लिए अभियान चलाने तथा केंद्र की मोदी सरकार द्वारा एनआरसी को पूरे देश में लागू करने की घोषणा का विरोध करते हुए देश के तमाम राज्यों में एनआरसी विरोधी आंदोलन खड़ा करने का निर्णय लिया है। बैठक में मोदी सरकार की कॉरपोरेट परिस्थितियों को देश में आई मंदी के लिए साफ तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए इन नीतियों के खिलाफ आंदोलन को और भी तेज करने का निर्णय लिया है। बैठक में इस मंदी से निपटने के बहाने मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट कंपनियों और अमीर घरानों को दी जा रही छूट को प्रतिगामी करार देते हुए इसे दूर करने के लिए मनरेगा मजदूरों को मजदूरी, किसानों को राहत, वृद्ध व विद्वानों को पेंशन की राशि में वृद्धि करने तथा बेरोजगारों को भत्ता देने की मांग पर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। बैठक में मोदी सरकार की निजीकरण व निगमीकरण की नीतियों के खिलाफ देशभर में उठ खड़े हो रहे श्रमिकों के आंदोलनों, कोयला मजदूरों, रेल मजदूरों व रक्षा उद्योग श्रमिकों के आंदोलनों का स्वागत करते हुए उसके साथ एकजुटता जताई तथा आगामी अक्टूबर महीने में भाकपा, माकपा व अन्य वाम दलों के साथ मिलकर 10 से 16 अक्टूबर तक देशव्यापी विरोध कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारी तेज करने का निर्णय लिया है।

कॉमरेड दीपंकर सेमीनार के होंगे मुख्य वक्ता

भाकपा माले केंद्रीय कमेटी की यह तीन दिवसीय बैठक 27 सितंबर को भी देर रात तक जारी रहेगी। शुक्रवार को ही बैठक स्थल सामुदायिक विकास भवन इंदिरा नगर में सांप्रदायिक फांसीवाद के दौर में भगतसिंह के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर एक सेमीनार भी आयोजित किया जाएगा। शहीद ए आजम भगतसिंह के 112वें जन्मदिन पर आयोजित हो रहे इस सेमीनार को भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य भी मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित करेंगे। अमेरिका की एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर व शहर के सम्मानित नागरिक डॉ. घासीराम वर्मा और शहर काजी मोहम्मद शफी उल्ला सिद्दीकी की अध्यक्षता में आयोजित इस सेमीनार को भाकपा (माले) के राज्य सचिव कामरेड महेंद्र चौधरी, अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड राजारामसिंह, भाकपा (माले) पोलित ब्यूरो के सदस्य व महिला नेता कामरेड कविता कृष्णन व प्रोफेसर सुधा चौधरी आदि समेत कई माले नेताओं और शहर के चुनिंदा पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, वामपंथी जनवादी विचारों द्वारा संबोधित किए जाने की संभावना है। भाकपा (माले) नेता व केंद्रीय कमेटी के सदस्य व किसान नेता कामरेड फूलचंद ढेवा, जिला सचिव कामरेड रामचंद्र कुलहरी ने शहर के तमाम जनवाद पसंद, लोकतंत्र पसंद नागरिकों, बुद्धिजीवियों और छात्र युवाओं से इस सेमीनार में शिरकत करने की अपील की है।